संस्कृति का रक्षण

 संस्कृति का रक्षण🚩🚩🙏

(सामाजिक लेख: पोवारी भाषा मा)

             धरती मा असंख्य जीव-जंतु सेती जिनमा मानव जात आपरी बुद्धि अन् कौशल को कारन् सब लक़ अनूठी जात आय। आपरो याद राख़न अना वोला पीढ़ी दर पीढ़ी सहेजकन राखन को गुन् को कारन् ज्ञान अना संस्कृति की निर्मती भई। दुनिया भर मा अलग-अलग प्रकार की परम्परा अना संस्कृति का विकास भयो। समय को साथ कई सभ्यता विकसित भई अना कई संरक्षण को अभाव मा मुराय भी गईन।

            संस्कृति अना सभ्यता का विकास कोनी येक दिवस को काम नहाय अना येला विकसित होनमा सदी लग जासे। इतिहास गवाह से कसो कई आक्रनता इनना आपरो निहित सुवारथ अन् जिद्द को कारन मानवता अना विकसित सभ्यता इनला नष्ट करन मा काई कसर नही सोढ़ीन। अज़ भी देश-दुनिया मा असी सोच का सेती परा सभ्य समाज अना नियमबद्ध समाज मा आता यव बिचार मान्य से की सप समान आती अना सबला आपरी सभ्यता, आपरी संस्कृति ला संरक्षित अना ओको प्रचार प्रसार को अधिकार से।

             सयुंक्त राष्ट्र संघ अना भारतवर्ष को संविधान, मिटती भाषा अना संस्कृति को जतन लाई सप नागरिक इनला अधिकार भी देसे अना सहयोग बी। राज्य शासन बी कई बिसरती बोली इनको संरक्षन अन् सवर्धन को कार्य कर रही सेती।

           हमारो पोवार समाज सैकड़ों बरस लक़ येक समुदाय को रूप मा रह रही से अना कई क्षेत्र मा समाज का विस्थापन भी भयो परा पुरो पोवारी कुनबा आपरो परिवार अना संस्कृति ला संग-संग धरकन चलत रहव्यो, येको कारन आम्हरी विशेष भाषा अना संस्कृति अज़ वरी जीवित रही। परा आता आमरी पोवारी संस्कृति अना भाषा परा बी यव संकट का बादर फिरतो चोय रही से। लोख आधुनिकता अना चलचित्र संस्कृति को प्रभाव मा आय रही सेती मंग आपरी मूल संस्कार इनला सोड़कन पश्चिम का आचार विचार इनला धारन कर रही सेत, जेको कारन् हमारो पुरातन सांस्कृतिक अस्तित्व अना स्थापित सामाजिक मानदंड टूट रही सेती।

          सयुंक्त परिवार को स्वरूप आता कमजोर होय रही से येको कारन् आपरो बुजुर्ग इनकी देखरेख साजरो लक़ नहीं होनको कारन् उनला अदिकादिक तकलीफ होन लगी से। समाज मा तलाक अना व्यभिचार बढ़न को कारन् परिवार को स्वरूप मा  आता दिक्कत देखनमा आय रही से। हमारो सनातनी संस्कार अना समाज का रीति-रिवाज ला मान कम होनको कारन् नवी पीढ़ी ला सही सामाजिक सांस्कृतिक संस्कार नहीं मिलन को कारन, समाज सांस्कृतिक पतन को रस्ता वरी जाय सिक से। असो नहाय की समाज ला यन संकट को भान नहाय, परा संगठित प्रयास को अभाव  को कारन यन दिशा मा मोठो जतन नहीं दिस रही से।

           आपरो सामुदायिक मूल्य, सनातनी संस्कार, राष्ट्रीय अना अतराष्ट्रीय विचारधारा इनमा समन्वय की जरत से अना हर स्तर परा ओको अनुरूप कोशिश करन को से। आर्थिक विकास जीवन को आधार से परा येको संगमा सबला सामाजिक अना सांस्कृतिक बिचार ला बी राख़न को सो। येको लाई अज़, "सतत् विकास" की अवधारना समाज की नवी जरत से। निसर्ग की महत्ता को संग आर्थिक उन्नति अना सांस्कृतिक स्वरूप ला यथावत् राख़कन यन नवी अवधारना को लक्ष्य ला पावनो सरल से।

          हमारो पोवार समाज ना सदा यन लक्ष्य को अनुरूप काम करीसेन येको लाई पंवार ला पृथ्वी की शोभा, असी संज्ञा भी भेटिसे। इतन् आयकन बी हमी ना वैनगंगा को क्षेत्र ला धन-धनसी लक सम्पन बनावन मा लगित साथ देया सेजन्। यन अतीत को गौरव ला नवी पीढ़ी ला सांगनो पढ़े, काहे की इतिहास, वर्तमान ला सीख देसे अना अज़ को काम, भविष्य को आधार से। अतीत, अज़ अना कल को साजरो समन्वय आपरो पोवार समाज, सनातन समाज अना भारतवर्ष ला मजबूत करन लाई खाश रहें, असो मोरो भरुषा आय।

✍🏻ऋषि बिसेन

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