पंवार (पोवार) समाज की ऐतिहासिक पहचान और 36 कुलों की परंपरा
पंवार (पोवार) समाज की ऐतिहासिक पहचान और 36 कुलों की परंपरा मध्य भारत में पंवार (पोवार) समाज के आगमन और उसकी ऐतिहासिक बसावट का प्रश्न समाज की पहचान, परंपरा और इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। समाज में प्रचलित ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मध्य भारत में पंवारों की प्रारंभिक प्रमुख बसावट प्रभु श्रीराम की नगरी रामटेक में हुई और इसी ऐतिहासिक पहचान के कारण दस्तावेजों एवं अभिलेखों में इनका उल्लेख “नागपुर पंवार” के रूप में भी मिलता रहा है। इसके बाद उपलब्ध जनगणना विवरणों तथा विभिन्न पुराने शासकीय एवं सामाजिक दस्तावेजों में इस समुदाय की प्रमुख उपस्थिति बालाघाट, सिवनी और भंडारा क्षेत्रों में दर्ज होने की बात सामने आती है। पंवार (पोवार) समाज का इतिहास केवल मौखिक परंपराओं तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि समाज से जुड़े लोगों के अनुसार इसके प्रमाण प्राचीन दस्तावेजों, शासकीय अभिलेखों, जनगणना विवरणों और सामाजिक परंपराओं में भी खोजे जा सकते हैं। समय के साथ स्थानीय समाजों के साथ सामाजिक संबंध और पारस्परिक संपर्क भी बने। इसी क्रम में कुछ समूहों द्वारा बाद के समय में स्वयं को कुमार घोषित किए ज...