"पोवार"
"पोवार"
श्री महेन जी पटले के द्वारा लिखित इस किताब में पोवार समाज की उत्पत्ति, विकास और विस्तार के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। पोवार समाज धारानगर से विस्तारित होकर वैनगंगा क्षेत्र में आकर बसा था और यह समाज आज "छत्तीस कुलीन पंवार समाज" के नाम से जाना जाता है। ये सभी कुल पुरातन क्षत्रिय हैं जिन्हे सम्मिलित रूप से पोवार या पंवार कहा जाता हैं।
भाटो ने इस समाज को मालवा के परमार बताया हैं जो मालवा से सबसे पहले नगरधन आये फिर नागपुर और अंत में वैनगंगा क्षेत्र में जाकर स्थायी रूप से बस गये।
"पोवार" नामक इस ग्रन्थ में इस समाज के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती हैं। श्री महेन जी पटले को इस भागीरथ प्रयास हेतु बहुत बहुत बधाइयाँ और अनंत शुभकामनायें।
The Link of this book is as below.-
https://drive.google.com/file/d/1rpDFBgtv1R1B1Sw-UztFzScCNU9ojHG4/view?usp=sharing

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