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1911 की जनगणना में पंवार राजपूत समाज की वास्तविक बसाहट

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1911 की जनगणना में पंवार राजपूत समाज की वास्तविक बसाहट सन् 1911 की Census of India, Central Provinces & Berar, Volume X तत्कालीन मध्य प्रांत एवं बेरार क्षेत्र की आधिकारिक जनगणना थी। अतः इसके आँकड़ों को उसी भौगोलिक क्षेत्र के संदर्भ में देखना चाहिए। इस जनगणना में Panwar (पंवार) को स्पष्ट रूप से “Sects of Rajput” अर्थात राजपूत की एक शाखा के अंतर्गत दर्ज किया गया है। इस क्षेत्र में पंवारों की कुल दर्ज जनसंख्या 1,51,208 थी, जिसमें 73,812 पुरुष और 77,396 महिलाएँ थीं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य उनकी भौगोलिक बसाहट है। भंडारा में 74,603, बालाघाट में 48,018 और सिवनी में 19,498 पंवार दर्ज थे। इन तीन जिलों को मिलाकर 1,42,119, अर्थात लगभग 94 प्रतिशत पंवार जनसंख्या इन्हीं तीन जिलों में केंद्रित थी। इसके विपरीत शेष जिलों में पंवारों की संख्या बहुत कम थी और वे बिखरी हुई थी। इसलिए 1911 के इस सरकारी अभिलेख से स्पष्ट होता है कि मध्य प्रांत एवं बेरार में पंवार समाज की मुख्य और सघन ऐतिहासिक बसाहट भंडारा, बालाघाट और सिवनी क्षेत्र में थी, जबकि अन्य जिलों में उनकी उपस्थिति नगण्य अथवा अत्यल्प थी। इसीलिए आ...

पंवार (पोवार) समाज की ऐतिहासिक पहचान और 36 कुलों की परंपरा

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  पंवार (पोवार) समाज की ऐतिहासिक पहचान और 36 कुलों की परंपरा मध्य भारत में पंवार (पोवार) समाज के आगमन और उसकी ऐतिहासिक बसावट का प्रश्न समाज की पहचान, परंपरा और इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। समाज में प्रचलित ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, मध्य भारत में पंवारों की प्रारंभिक प्रमुख बसावट प्रभु श्रीराम की नगरी रामटेक में हुई और इसी ऐतिहासिक पहचान के कारण दस्तावेजों एवं अभिलेखों में इनका उल्लेख “नागपुर पंवार” के रूप में भी मिलता रहा है। इसके बाद उपलब्ध जनगणना विवरणों तथा विभिन्न पुराने शासकीय एवं सामाजिक दस्तावेजों में इस समुदाय की प्रमुख उपस्थिति बालाघाट, सिवनी और भंडारा क्षेत्रों में दर्ज होने की बात सामने आती है। पंवार (पोवार) समाज का इतिहास केवल मौखिक परंपराओं तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि समाज से जुड़े लोगों के अनुसार इसके प्रमाण प्राचीन दस्तावेजों, शासकीय अभिलेखों, जनगणना विवरणों और सामाजिक परंपराओं में भी खोजे जा सकते हैं। समय के साथ स्थानीय समाजों के साथ सामाजिक संबंध और पारस्परिक संपर्क भी बने। इसी क्रम में कुछ समूहों द्वारा बाद के समय में स्वयं को कुमार घोषित किए ज...