पंवार(पोवार) समाज का परिचय और इतिहास
पंवार(पोवार) समाज का परिचय और इतिहास पंवार(पोवार) समाज का परिचय और इतिहास पंवार(पोवार) जाति पुरातन छत्तीस क्षत्रियों कुलों का एक संघ है। प्राचीन काल में ये कुल अलग-अलग पौर याने जनपद के प्रमुख हुआ करते थे इसीलिए इन्हें पौर राजा या पोवार तथा कालांतर में पंवार कहा जाने लगा। प्राचीन ग्रंथों में इन्हें ही छत्तीस पुरातन क्षत्रिय या राजपुत्र माना गया है। इनका मूल निवास अखंड भारत वर्ष के उत्तर पश्चिमी यानि आधुनिक ईरान से लेकर मगध से लेकर नर्मदा के क्षेत्र तक फैला हुआ था। कालांतर में अवंती एक शक्तिशाली राज्य बना और इसके राजाओं जैसे सम्राट विक्रमादित्य ने इस सम्पूर्ण क्षेत्र पर शासन किया। वैदिक कालिन अस्तित्व वैदिक काल में पोवार जाती के लोग प्राचीन पौर (वैदिक जाती पुरु ) होने के प्रमाण मिले है। उन पौर लोगो को अंग्रेजी में Powar, Puar, Puvar , Pravara , Ponwar, Panwar आदि लिखा मिलता है। ऋग्वेद का यह मन्त्र दर्शाता है की वैदिक समय में पौर थे । ...

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